Bengaluru
छायाचित्र : श्री. गिरीश पंत

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी  विभाग के प्राध्यापक नितिन सक्सेना को बीजगणित कॉम्प्लेक्सिटी थ्योरी में उनके काम के लिए २०१८ के शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। कम उम्र मे ही भटनागर पुरस्कार पाने वाले प्राध्यापक सक्सेना, कम्प्यूटेशनल कॉम्प्लेक्सिटी, बीजगणितीय ज्यामिति आदि क्षेत्रों में शोध कार्य कर रहे हैं।

शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के संस्थापक के नाम पर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट और उल्लेखनीय शोध के लिए प्रदान किया जाता है। इसमें ५ लाख रूपये की पुरस्कार राशि, एक उद्धरण पट्टिका और ६५ वर्ष की आयु तक फैलोशिप दी जाती है।

६१  वर्षों के लंबे इतिहास में यह पुरस्कार, कई महान वैज्ञानिको और इंजीनियरों को मिला है। इस सम्मान के बारे में प्राध्यापक सक्सेना कहते हैं कि, “मैं इस उत्कृष्ट वर्ग का हिस्सा बनकर बहुत भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं। यह पुरस्कार मुझे मेरे शोध क्षेत्र में कठिन समस्याओं पर काम जारी रखने और अगली पीढ़ी के जटिल सिद्धांतकारों को सलाह देने के लिए प्रेरित करता है।” उन्होंने आगे कहा कि, "मैं अपने परिवार का उनके प्यार ओर समर्थन के लिए आभारी हूँ; साथ ही साथ शिक्षकों और दोस्तों के द्वारा प्रेरणा देने के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूँ । मैं उन सभी को अपनी सभी सफलताएँ समर्पित करना चाहता  हूँ।"

प्राध्यापक सक्सेना का काम गणित के एक ऐसे विषय से संबंधित है जिसे “बीजगणितीय सर्किट” के रूप में जाना जाता है। इसमें कुछ गणितीय समस्याओं, जैसे सुडोकू पहेली का तेज़ और सटीक दृष्टिकोण से हल करना हो सकता है। लेकिन, किसी भी आकार की सुडोकू पहेली को हल करने के सभी संभावित तरीकों को ढूंढने जैसी प्रक्रिया, एक बेहद जटिल समस्या हो जाती है। इस तरह की जटिल समस्याओं को बहुपदों द्वारा अभिव्यक्त किया जा सकता है, ये अभिव्यक्तियाँ जिनमें जोड़, घटाव, गुणा और एक्सपोनेंट जैसे चर और संचालन शामिल हैं।

बहुपद पहचान परीक्षण से पता चलता है कि क्या दो बहुपद, जिनमें कई बहुचर हों, बराबर होते है? बीजगणितीय विधियाँ यह निर्धारित करने में सहायता करती हैं कि इसे हल करना कितना जटिल होगा। बहुपद पहचान परीक्षण के क्षेत्र में सैद्धांतिक अनुसंधान संभावित रूप से क्रिप्टोग्राफी, त्रुटि-सुधार, एल्गोरिदम एवं सिस्टम के अनुकूलन और मशीन लर्निंग में मदद कर सकता है।

बीजगणितीय समीकरणों को बहुपद समीकरणों और बहुपद पहचान परीक्षण के लिए गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है। हल करने की एक समस्या को बीजगणित सर्किट के रूप में दर्शाया जाता है- एक ग्राफ जिसमें इनपुट और संचालन का प्रतिनिधित्व करने के लिए, निर्देशित कनेक्शन के साथ नोड्स और गेट्स शामिल हैं। नोड्स और किनारों की संख्या ग्राफ के 'आकार' को दर्शाती है। इसके साथ-साथ यह ये भी दर्शाता है कि समस्या का समाधान करने के लिए कंप्यूटर कितना समय ले सकता है।

बहुपद समीकरण को देखते हुए एक ऐसे सर्किट को खोजने की आवश्यकता होती है जिससे बहुपद की गणना की जा सके , उसे ऊपरी सीमा समस्या कहा जाता है, और यह ये भी साबित करने की आवश्यकता होती है कि प्रस्तावित सर्किट इसे हल करने का सबसे तेज़ तरीका है, जिसे निचली सीमा समस्या के रूप में जाना जाता है। प्राध्यापक सक्सेना बताते हैं, "अक्सर, यह संरचनात्मक 'आकार' 'समय' की अनुक्रमिक धारणा को अध्ययन करने के लिए अधिक सुविधाजनक है। निचली बाध्य समस्या को बहुपद से संबंधित सबसे छोटे बीजगणितीय सर्किट को खोजने के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है।"

सरल बहुपद जैसे (X-Y)(X+Y) = (X2-Y2), बीजगणितीय तरीके से हल किये जा सकते हैं। हालाँकि, जब बहुपदों में कई चर और उच्च घाते होती हैं, तो जटिलता तेजी से बढ़ जाती है। बहुपद पहचान परीक्षण की सटीक कम्प्यूटेशनल जटिलता को ढूंढना इस विषय क्षेत्र में सबसे महत्त्वपूर्ण अनसुलझी समस्याओं में से एक है। प्राध्यापक सक्सेना ने इस समस्या को हल करने में, एक कदम आगे बढ़ाया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक बहुत ही विशेष प्रकार के सर्किट मॉडलों का अध्ययन सामान्य सर्किटों के गुणों को समझने के लिए पर्याप्त होगा।

एक संबंधित अध्ययन में, प्राध्यापक सक्सेना ने एक नया मॉडल विकसित किया है जिसने एक और अनसुलझी समस्या को हल करने में मदद की। उन्हें और उनके सहयोगियों को बीजगणितीय पहचान परीक्षण के लिए एक बीजगणितीय सर्किट के मॉडल के लिए एक हल मिला जिसमें बहुत कम इनपुट चर हैं। यहाँ, केवल एक सर्किट के इनपुट और आउटपुट ज्ञात हैं, और सटीक आंतरिक कनेक्शन ज्ञात नहीं हैं। इस समस्या को हल करने के लिए प्रस्तावित गणित तकनीक में गणित की अन्य अनसुलझी समस्याओं को हल करने में उपयोगी होने की संभावना है।

बीजगणितीय सर्किट का अध्ययन भी नई गणितीय अवधारणाओं को जन्म देता है। उदाहरण के लिए, प्राध्यापकसक्सेना ने साबित कर दिया है कि विशिष्ट 'छोटे' सर्किट के रूट्स या हल, 'छोटे सर्किट' होंगे। इसके नतीजे इतने प्रत्यक्ष नहीं है, क्योंकि कुछ छोटे आकार के सर्किट बहुत बड़े बहुपदों की गणना कर सकते हैं, और उनके समाधान काफी बड़े हो सकते हैं। उन्होंने यह भी पता लगाने के लिए एक नया एल्गोरिदम विकसित किया है कि बहुपद समीकरणों की एक प्रणाली में रुट (मूल) है जो बहुत करीब से अनुमानित है लेकिन सटीक नहीं है। नये एल्गोरिदम कंप्यूटिंग संसाधनों और कार्यान्वयन के समय के संबंध में पिछले एल्गोरिदम की तुलना में कई गुना बेहतर है।

प्राध्यापक सक्सेना बीजगणितीय सर्किट के क्षेत्र में कई अन्य समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहते है। "मैं तकनीक को मजबूत करने और उसके दायरे को बढ़ाने के लिए अपना काम जारी रखना चाहता हूं।" कहकर उन्होंने अपनी बात समाप्त की। 

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